July 24, 2024

छत्तीसगढ़ में जी-20 समिट की बड़ी बैठक होगी:अंतरराष्ट्रीय संगठन के चौथे वित्त कार्यसमूह की मेजबानी मिली


रायपुर: इस साल भारत को वैश्विक संगठन जी-20 की अध्यक्षता मिली है। इस संगठन की एक बड़ी बैठक छत्तीसगढ़ में भी होगी। यह जी-20 के चौथे वित्त कार्य समूह की बैठक है, जिसका आयोजन अगले साल सितंबर महीने में होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ वर्चुअल बैठक कर तैयारियों के संबंध में चर्चा की।


भारत की अध्यक्षता में जी-20 का 18वां शिखर सम्मेलन 2023 में 9 और 10 सितम्बर को नई दिल्ली में होना है। यह सम्मेलन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के आदर्श पर आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सभी प्रदेशों के कुल 56 स्थानों पर 215 बैठकें प्रस्तावित हैं। छत्तीसगढ़ में वित्त कार्य समूह की बैठक होनी है। इसमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों को शामिल होना है।

वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, जी-20 की अध्यक्षता करने का भारत को उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुआ है। इस दौरान हमें ‘अतिथि देवो भव’ की सांस्कृतिक परंपरा एवं विविधता में एकता की भावना को विश्व को प्रदर्शित करना है। इस आयोजन को वैश्विक नजरिए से देखना आवश्यक है। इसमें सभी राज्यों को अपनी कला, संस्कृति, अपनी विशिष्टता दिखाने का अवसर मिलेगा। जी-20 देशों के एक लाख से भी अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति, देश के विभिन्न राज्यों में बैठकों, सम्मेलनों में शामिल होंगे। सालभर चलने वाले इन कार्यक्रमों में जनभागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके अलावा सभी राज्यों को अपनी ओर से कुछ नये कार्यक्रम भी जोड़ना चाहिए। राज्य के विश्वविद्यालयों, स्कूली विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संगठनों को भी जी-20 के कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।

क्या है यह जी-20
जी-20 को ग्रुप ऑफ ट्वेंटी भी कहा जाता है। यह अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनिअन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका का 1999 में बना एक अनौपचारिक समूह है। इसका कोई केंद्रीय मुख्यालय नहीं है। हर साल इसमें शामिल कोई एक देश इस संगठन की अध्यक्षता करता है। उस साल भर में उसका सचिवालय भी अध्यक्षीय देश में काम करता है। एक दिसंबर 2022 से अगले साल नवंबर तक इसकी अध्यक्षता भारत के पास है।


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