April 18, 2026

महिला का पुनर्जन्म : मृत महिला हुई जिंदा! अंत्येष्टि की तैयारी में लगे परिजनों ने देखा शव में हलचल

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कोरबा। पुनर्जन्म और मृत्यु के कुछ घंटे बाद संबंधित व्यक्तियों के अचानक जीवित हो उठने के मामले यदाकदा प्रकाश में आते रहे हैं। जिले के तिलकेजा गांव में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। निजी अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक महिला मरीज के मौत की पुष्टि के बाद परिजन मृत महिला की अंत्येष्टि की तैयारी में लगे हुए थे इसी दौरान अचानक उसके शरीर में हलचल हुई जिसके बाद गांव के चिकित्सक ने देखा तो हृदय गति चल रही थी। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। चमत्कार की आस में जुटे लोग तब निराश हो गए जब कुछ देर बाद महिला को चिकित्सकों ने अंतत: मृत घोषित कर दिया।


उरगा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तिलकेजा के वार्ड क्रमांक 15 में निवासरत तुलाराम की धर्मपत्नी संतराबाई बंजारे की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। 26 मई को हालत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए शहर के कोसाबाड़ी स्थित गीता देवी मेमोरियल हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया था। इसी बीच शुक्रवार को महिला की स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई जिसके बाद 28 मई की शाम लगभग 4 बजे अस्पताल प्रबंधन द्वारा संतराबाई को मृत घोषित कर दिया गया और परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र भी दे दिया गया।

जिसके बाद महिला का शव लेकर परिजन अपने घर चले गये। रात हो जाने की वजह से महिला का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। 29 मई की सुबह अंतिम संस्कार से पहले की रस्में पूरी की जा रही थी। शव को स्नान कराकर हल्दी लगाया जा रहा था। इस दौरान लोग तब हक्के-बक्के रह गए जब उन्होंने महिला के हाथ-पैर में हलचल होते देखी।

फौरन गांव के चिकित्सक को बुलाया गया। उसने अपने स्तर पर परीक्षण के साथ स्पष्ट किया कि महिला जीवित है। इस आधार पर परिजनों ने संजीवनी 108 की मदद से संतराबाई को काफी उम्मीद के साथ कोरबा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ घंटों बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिससे चमत्कार की आश लगाए बैठे परिजन निराश हो गए।

सूत्रों की मानें तो संतराबाई को जिला अस्पताल में लाने के बाद महिला का फिर से परीक्षण किया गया और स्पष्ट किया गया कि महिला के शरीर में जान नहीं है। मृतका के पुत्र कुंजलराम व रामशरण की मानें तो निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान लापरवाही बरती गई है। बिना परीक्षण के ही मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि उपचार के लिए 70 हजार में खेत गिरवी रखकर पैसों को इंतजाम किया गया था। उक्त रकम भी अस्पताल प्रबंधन की मनमाने इलाज की भेंट चढ़ गई है।


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