April 22, 2026

विद्यार्थी ध्यान दें: फरवरी के बाद ऑफलाइन मोड में होगी स्कूल-कॉलेज की सभी परीक्षाएं

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रायपुर: प्रदेशभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप से हड़कंप मचा हुआ है। वहीं संक्रमण दर के अनुसार स्कूल-कॉलेजों को बंद करवा दिया गया है। पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की फरवरी में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाएं भले ऑनलाइन मोड में हो रही है। लेकिन फरवरी के बाद जो भी स्कूल-कॉलेज की सभी परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में होगी। छात्रों को केंद्र में आकर पेपर लिखना होगा। कोरोना के मामले अगले महीने से कम होने की संभावना है। ऐसा होने पर राजधानी में भी अगले महीने से स्कूल व कॉलेज खुल सकते हैं।


संक्रमण दर के अनुसार बंद किए गए स्कूल
अफसरों का कहना है कि जहां कोरोना काे लेकर संक्रमण दर कम हैं वहां स्कूल खुले हैं। दसवीं-बारहवीं के बच्चों के प्रैक्टिकल लिए जा रहे हैं। राजधानी में भी स्थिति सामान्य होने पर स्कूल खुल सकते हैं। पहले, कोरोना को लेकर एक साथ स्कूल बंद होते थे और एक साथ खुलते थे। लेकिन इस बार संक्रमण दर के अनुसार स्कूल बंद किए गए। फरवरी में राज्य के अधिकांश जिलों में स्कूल खुल जाएंगे।

कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढाई बंद
दसवीं-बारहवीं सीजी बोर्ड की परीक्षा 2 मार्च से है। इसकी समय-सारणी जारी की जा चुकी है। स्कूल खुलने के बाद परीक्षा के आयोजन में परेशानी नही होगी। पिछली बार कोरोना की वजह से दसवीं-बारहवीं की परीक्षाएं प्रभावित हुई थी। दसवीं की परीक्षा नहीं हुई थी। असाइनमेंट के आधार पर रिजल्ट जारी किए गए थे। इसी तरह बारहवीं का पेपर छात्रों ने घर से लिखकर जमा किया था। गौरतलब है कि राज्य में कई जिलों में स्कूल बंद हैं और कई जगह खुले। लेकिन कोरोना को लेकर राज्यभर में कॉलेज-विवि में ऑफलाइन पढ़ाई बंद हैं।

जनरल प्रमोशन नहीं होगा, पेपर देना होगा
कक्षा नवमीं-ग्यारहवीं के छात्रों को इस बार स्कूल आकर पेपर देना होगा। ऑफलाइन परीक्षा के आसार ज्यादा है। दो साल से नवमीं-ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षा नहीं हो रही है। छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जा रहा है। लेकिन इस बार पेपर होंगे। अधिकारियों का कहना है कि अगस्त से दिसंबर तक स्कूलों में पढ़ाई हुई। करीब 70- 80 प्रतिशत कोर्स खत्म हो चुके हैं। इसलिए परीक्षा आयोजित की जाएगी। नवमीं-ग्यारहवीं की परीक्षा अप्रैल में होगी। तब तक स्थितियां सामान्य हो जाएगी। कोरोना को लेकर राजधानी समेत कुछ जिलों में स्कूल बंद हैं। कोरोना के मामले कम होते हैं, इसके बाद भी छाेटे बच्चों की कक्षाएं लगने की संभावना कम है।

 


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