April 19, 2026

कोरोना के बीच मंडराया मंकीपॉक्स वायरस का खतरा: जानें लक्षण और बचाव

monk

नई दिल्ली: अब विश्व में मंकीपॉक्स नामक वायरस का खतरा मंडराने लगा है। कम से कम नौ यूरोपीय देशों बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम में चिंताओं को जन्म दिया है। इसके साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से भी मामले सामने आए हैं।


क्या है मंकीपॉक्स और कहां से आया?
मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरस है जो कि आम तौर पर जंगली जानवरों में पाया जाता है। हाल ही में इसके कई मामले विदेशों में देखे गए हैं। डबल्यूएचओ के अनुसार इस बीमारी की पहचान पहली बार साल 1958 में हुई थी। उस वक्त कुछ बंदरों पर रिसर्च किया जा रहा था रिसर्चर के मुताबिक बंदरों में चेचक जैसी बीमारी हुई थी, जिसके बाद इसे मंकीपॉक्स का नाम दे दिया गया। डबल्यूएचओ के मुताबिक इस बीमारी का मनुष्यों में पहली बार संक्रमण 1970 के दशक में हुआ था। इस दौरान कांगों में एक 9 साल के बच्चे को सबसे पहले यह बीमारी हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के काटने या उसके खून या फिर उसके फर को छूने से हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि यह चूहों, चूहों और गिलहरियों द्वारा भी बड़ी तेजी के साथ फैलता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षणों की बात करें तो मंकीपॉक्स होने के सप्ताह भर के अंदर संक्रमित व्यक्ति बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण का अनुभव करते हैं। कई गंभीर मामलों में लोगों के चेहरे और हाथों पर दाने और घाव भी हो सकते हैं जो कि शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकते हैं। इसलिए ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

मंकीपॉक्स से संबंधित इलाज
लक्षण दिखने के बाद मंकीपॉक्स आमतौर पर 5 से 20 दिनों के बीच ठीक हो जाता है। इस मामले में ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जाता है। लेकिन डबल्यूएचओ के मुताबिक 10 में से एक व्यक्ति के लिए मंकीपॉक्स घातक हो सकता है और बच्चों के केस में इसे गंभीर माना जाता है। ऐसे में इससे सावधान रहना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चेचक के टीकों का मंकीपॉक्स पर भी प्रभाव रहता है। फिलहाल मंकीपॉक्स को लेकर एंटीवायरल दवाएं भी विकसित की जा रही हैं।


You may have missed