शादी में दूल्हा-दुल्हन को तोहफे में मिली 100 किलो मिठाई और कई टन मछली, जानें क्या है मामला
हैदराबाद– पूर्वी गोदावरी जिले में शादी के बंधन में बंधे दो परिवारों की पूरे राज्य में चर्चा हो रही है. दोनों परिवारों ने ईमानदारी और सम्मान के लिए शादी के दौरान उपहार साझा किए थे. इन उपहारों को लेकर ही लोगों के बीच उत्सुकता और उत्साह है, कि किस परिवार ने क्या उपहार में दिया है. दरअसल गोदावरी जिला अपने सम्मान, सत्यनिष्ठा और सदाचार की पेशकश के लिए जाना जाता है. यह जानकर हैरानी होगी कि दूल्हे के पिता ने अपनी बहू को 20 किस्मों की करीब 100 किग्रा मिठाई और अन्य सामान उपहार में दिया है. वहीं दुल्हन के पिता भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने अपने दामाद को सामान और उपहारों के साथ विभिन्न प्रकार की कई टन मछली तोहफे में दी है.


सोशल मीडिया और अन्य मीडिया में दोनों परिवारों का यह व्यवहार चर्चा का विषय बना हुआ है. परिवारों के तोहफे की फोटो और उनकी खबर वायरल हो चुकी है. दो गोदावरी जिलों और तेलुगू राज्यों में भी इन्हीं परिवारों के बारे में खबरें सुर्खियों में हैं. गोदावरी जिलों के बारे में यह बात सामान्य है कि यहां के लोग ईमानदार होते हैं और वे अखंडता में विश्वास रखते हैं. वे समारोह, उत्सवों और विवाहों में उत्साह से शामिल होकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम प्रकट करने के लिए उपहार देते हैं.
इन दोनों परिवारों के नजदीकी रिश्तेदारों के बीच भी यह उत्सुकता थी कि शादी के समय दूल्हा और दुल्हन को उपहार में क्या-क्या मिलने वाला है. हालांकि नवविवाहितों को उपहार देना सामान्य है, लेकिन यहां उन्हें मोटी रकम और सोने के उपहार दिए जाते हैं. सदियों पुरानी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार यह आम बात है कि समाज के लोग पूछते हैं कि दुल्हन को कितना सोना और संपत्ति दी गई, या फिर दूल्हे को क्या-क्या और कितना उपहार मिला है. दूल्हे को मिले उपहारों और दुल्हन को मिली प्राथमिकता पर खास ध्यान दिया जाता है. यहां दुल्हन को सम्मान देने के लिए शादी के बाद का पहला त्योहार विशेष होता है. इसमें श्रावण, आषाढ़ और संक्रांति को लेकर खास तौर पर परिवार में उत्साह और उल्लास होता है.
गदरदा गांव में तोहफों को देख हैरान रह गए ग्रामीण
पूर्वी गोदावरी जिले के कोरुकोंडा मंडल के गदरदा गांव की चर्चा हो रही है. यहां के व्यापारी बथुला बलरामकृष्ण ने मई में यनम के थोटा राजू के बेटे पवन कुमार के साथ अपनी बेटी प्रत्यूषा का विवाह धूमधाम से किया था. जब बलरामकृष्ण जब अपनी बेटी को लेने के लिए दामाद के गांव आए तो उन्होंने तोहफे से भरा एक ट्रक सौंपा. इसमें 100 किलो मिठाई, कई प्रकार की मछलियां, कई प्रकार के फल और सब्जी वह भी टनों में, 10 भेड़, 50 लड़ाकू मुर्गा आदि बहुत सारा सामान भी शामिल था.
इसके बाद श्रावण के पवित्र महीने में बथुला परिवार ने भी जरूरी सामान, फल और सब्जी, कई प्रकार की साडि़यां और कपड़ों के साथ 20 प्रकार की एक टन मिठाइयां भेंट कीं. लोगों में चर्चा हो रही है कि ये दोनों परिवार आने वाली संक्रांति पर एक-दूसरे को क्या तोहफे में देने वाले हैं.

