कोर्ट ने शाहरुख पर तय किया ‘अटेम्प्ट टू मर्डर’ का आरोप, पुलिस पर तानी थी बंदूक
नई दिल्ली. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान एक हेड कांस्टेबल पर पिस्तौल तानने के आरोपी शाहरुख पठान समेत कुल के खिलाफ आरोप तय किए हैं. कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपी शाहरुख पठान पर अतिरिक्त धारा आर्म्स एक्ट भी जोड़ा है.


कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपी शाहरुख पठान समेत शमीम, अब्दुल सहजाद, इश्तियाक मलिक के खिलाफ आरोप तय किए हैं. कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 147, 148, 186, 188, 353, 307 के तहत आरोप तय किए. कोर्ट ने शाहरुख पठान पर अतिरिक्त धारा आर्म्स एक्ट भी जोड़ा है.
पिस्तौल लहराता और फायरिंग करते हुए नजर आया था शाहरुख
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थकों और उसके प्रदर्शनकारियों के बीच पिछले साल फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं थी. प्रदर्शन के दौरान आरोपी शाहरुख पिस्तौल लहराता और फायरिंग करता हुआ नजर आया था. उसे रोकने की कोशिश करने पर शाहरुख ने दिल्ली पुलिस के एक जवान पर पिस्तौल तान दी थी. पुलिस ने बाद में शाहरुख को यूपी से गिरफ्तार किया था.दिल्ली पुलिस के आंकड़ो के मुताबिक इस दिल्ली में हुई हिंसा में कम से कम 53 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हो गए थे.
कोर्ट ने दिनेश यादव को करार दिया दोषी
इससे पहले सोमवार को दिल्ली में हुए दंगों के मामले में कोर्ट ने आरोपी दिनेश यादव को दोषी करार दिया गया है. उसकी सजा का ऐलान 22 दिसंबर को होगा. यह मामला नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के गोकलपुरी इलाके का है. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक दंगों के दौरान 25 फरवरी की रात मनोरी नाम की एक 73 साल की बुजुर्ग महिला के घर में करीब 150 से 200 दंगाइयों ने जबरन घुसकर आगजनी की थी. साथ ही घर में मौजूद जरुरी सामान और भैंस की लूट कर ली थी. दिनेश यादव आगजनी करने वाली भीड़ का सक्रिय सदस्य था. उसके खिलाफ गोकलपुरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था.
कोर्ट ने दिनेश यादव पर 3 अगस्त 2021 को आगजनी और लूटपाट मामले में आरोप तय किए थे. 8 जून 2020 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. अपने बचाव में उसने कहा था कि पुलिस के पास उस घटना की CCTV फुटेज नहीं है. इसके साथ ही उसने FIR और गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी की भी बात कही थी. उसने गवाहों पर भी शक जताया था. वहीं पुलिस की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई थी कि दंगों के दौरान पुलिस शांति कायम कराने में लगी हुई थी. दंगे थमने के बाद कर्फ्यू लग गया था इसी वजह से FIR दर्ज करने में थोड़ा टाइम लग गया. पुलिस ने कहा था कि दंगा ममाले में पीड़ित के साथ ही कई और गवाह भी हैं.

