हल्दी की रस्म के दौरान दुल्हन बनी मां, परिवार की खुशियां हुई दोगुनी
कोंडागाव: छत्तीसगढ़ के कोंडागाव जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दुल्हन ने अपनी हल्दी की रस्म के दौरान एक बच्चे को जन्म दिया। वहीं बच्चे के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल दोगुना हो गया। दरअसल जिले के बड़ेराजपुर ब्लॉक अंतर्गत बांसकोट गांव में शादी से एक दिन पहले हल्दी की रस्म के दौरान एक दुल्हन ने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन बिना शादी के बच्चा होने पर परिवार वालों ने कोई विरोध नहीं किया और अगले दिन परिवार दोहरी खुशी के साथ दुल्हा-दुल्हन की शादी की तैयारियों का इंतजाम में जुट गया। जब दुल्हन की मां से इसके पीछे की वजह पूछी गई तो उन्होंने बताया कि “आदिवासी समाज में चलने वाली पैठू प्रथा के चलते उनकी लड़की 2021 में अपने पसंद के लड़के चंदन के घर पैठू गई हुई थी और अब दोनों की शादी करने का फैसला लिया गया था। जिसके चलते ही शादी के दौरान उनकी बेटी ने बच्चे को जन्म दिया।”


बच्चे के आने के बाद शादी की तैयारी में जुटा परिवार
जानकारी अनुसार बड़ेराजपुर के बांसकोट निवासी शिवबत्ती की शादी ओडिशा निवासी चंदन नेताम के साथ 31 जनवरी को होनी थी। 30 जनवरी को हल्दी लेपन का कार्यक्रम था जिसके बीच ही लड़की के पेट में दर्द शुरू हो गया। घर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बांसकोट में दुल्हन को जांच के लिए ले जाया गया। रविवार की सुबह 10 बजे के करीब दुल्हन ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के होने पर परिवार में दोगुनी खुशी आ गई थी जिसके बाद अब परिवार शादी में जुटा हुआ है।
आदिवासी समाज में आज भी है पैठू प्रथा का प्रचलन
आपने लिव इन रिलेशनशिप का नाम तो जरूर सुना होगा लेकिन शायद ही पैठू प्रथा के बारे में आपको जानकारी न हो तो बता दें कि दोनों एक ही चीज है जिसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नाम दिए गए हैं। आदिवासी समाज में पैठू प्रथा का प्रचलन आज भी है जिसमें लड़की शादी से पहले ही अपने पसंद के लड़के के घर जाकर रहने लगती है और इस पर लड़का-लड़की दोनों के परिवार वालों को कोई ऐतराज भी नहीं होता। पैठू होने के बाद दोनों का परिवार शुभ मुहूर्त देख कर दोनों की शादी करा देता है। अक्सर नवाखाई या त्यौहार के मौके पर वैवाहिक कार्यक्रम तय किया जाता है।

