परीक्षा केंद्र पर तलाशी के नाम पर उतरवाए गए छात्राओं के ब्रा, रोते हुए एग्जाम देने के बाद पुलिस से शिकायत
कोल्लमः मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के दौरान एक शर्मनाक मामला सामने आया है। केरल के कोल्लम जिले के मार्थोमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में परीक्षा के पहले तलाशी के नाम पर छात्राओं के ब्रा उतरवा दिए गए। कुछ छात्राओं ने जब ब्रा उतारने से मना किया, तो जांच कर्मचारी ने परीक्षा के लिए प्रवेश से मना कर दिया। अपमानजनक अनुभव का सामना करने के बाद छात्राओं ने रोते हुए परीक्षा दी। परीक्षा के बाद अभिभावकों ने बेटी को रोते हुए देखा, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की है। केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।


क्या है पूरा मामला
दरअसल, रविवार 17 जुलाई को देशभर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें 18 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसी दौरान केरल के कोल्लम में परीक्षा में शामिल होने वाली छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए अंडरगारमेंट्स हटाने के लिए कहा गया था। परीक्षा हॉल में प्रवेश के पहले मेटल डिटेक्टर से जांच के दौरान बीप साउंड आने पर जांच कर्मचारियों ने प्रवेश से मना कर दिया। बीप साउंड ब्रा में लगे मेटल हुक की वजह से आ रहा था इसलिए कर्मचारी ने ब्रा उतारने के लिए कहा।
एग्जाम प्रोटोकॉल के तहत छात्र मेटल की कोई चीज लेकर नहीं जा सकते हैं। ब्रा में लगे हुक मेटल के बने होते हैं। हालांकि एडवायजरी में बेल्ट का उल्लेख है, लेकिन ब्रा या अंडरगारमेंट्स का नहीं। एक छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी को 3 घंटे तक बिना इनरवियर के असहज होकर बैठना पड़ा। उसने नीट बुलेटिन में उल्लिखित ड्रेस कोड के अनुसार कपड़े पहने थे, जिसमें इनरवियर के बारे में कुछ नहीं कहा गया था। इस घटना की निंदा करते हुए कई युवा संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
मार्थोमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अधिकारियों ने सफाई दी कि उनका कोई भी कर्मचारी तलाशी प्रक्रिया में शामिल नहीं था। जांच के लिए दो एजेंसियों को काम सौंपा गया था, उन्हें तो इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है कि इस पर क्या नियम हैं। केरल पुलिस ने छात्रा के पिता की शिकायत पर आईपीसी की धारा 354 और धारा 509 के तहत केस दर्ज किया गया है। केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी घटना की जांच के आदेश दिए हैं। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ आर बिंदू ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताया है।

