April 23, 2026

आज है अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस: छत्तीसगढ़ के इस जिले में स्थित है ऐतिहासिक कुकुर देव मंदिर, पूजा करने से नहीं काटता कुत्ता

Kukur Dev Mandir Khapri

बालोद: हर साल पूरे विश्व में 26 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के एक गांव में स्थित ऐतिहासिक कुकुर देव मंदिर है, जहां पर स्थापित भगवान शिव जी की मूर्ति के पास स्वामी भक्त कुत्ते की प्रतिमा जो कि लोगो के लिये आस्था का प्रमुख केन्द्र है। वास्तव में यह एक स्मृति स्मारक है जो कि भगवान शिव जी को समर्पित है। वहीं, क्षेत्र सहित दूर दूराज इलाकों से लोग यहां श्रद्वापूर्वक आते है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादे पूरी होती है। वहीं, लोगों की अटूट आस्था इस स्थल के प्रति बनी हुई है। ऐसे में नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों के द्वारा मनोकामना ज्योतिकलश भी प्रज्वलित किए जाते है।


ग्राम खपरी में स्थित है कुकुर देव मंदिर
दरअसल, बालोद जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खपरी है। जहां कुकुर देव मंदिर है, इसी मंदिर की वजह से यह गांव आज समूचे राज्य मे प्रसिद्व है। इस ऐतिहासिक और पुरातत्वीय मंदिर का निर्माण फणी नागवंशीय शासको द्वारा 14वी 15वी शताब्दी के मध्य कराया गया है। गर्भ गृह मे जलधारी योनिपीठ पर शिवलिंग स्थापित है, इसके साथ ही उसी के पास स्वामी भक्त कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है। जहां पर लोगो की अटूट आस्था इस स्थल के प्रति है, इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक रोचक किदवंती प्रचलित है।

जानिए क्या हैं पूरा मामला?
बता दें कि, बहुत पहले एक बंजारा कर्ज न छुटा पाने की स्थिति में साहूकार को अपना पालतू कुत्ता दे दिया था, जिसके बाद साहूकार के यहां जब चोरी हुई तो उस कुत्ते की चालाकी से चोरी हुये सभी जेवरात व समान साहूकार को वापस मिल गया। ऐसे में साहूकार बेहद खुश हुआ और उस कुत्ते को उसके मालिक के पास वापस भेज दिया। इस दौरान उसके स्वामीभक्त होने का एक पर्ची उसके गले मे लगा दी गई। बंजारे के पास कुत्ता जैसे ही पहुचा तो बंजारा अपने कुत्ते के प्रति सख्त नाराज हुआ। बिना सोचे समझे उसने कुत्ते को मार दिया। उसे लगा कि मैं कुत्ते को साहूकार के पास छोड़कर आया हू और यह वापस आ गया। लेकिन जब पर्ची पढ़ा तो वह पश्चाताप करने लगा। बंजारा के द्वारा अपने कुत्ते को इसी स्थल में दफन किया। स्वामी भक्त कुत्ते की याद में यह दफन स्थल बनवाया गया, जहां पर फणी नागवंशीय शासको द्वारा 14वी 15वी शताब्दी के मध्य इस मंदिर का निर्माण कराया गया।

मंदिर के प्रति है लोगों की अटूट आस्था
वहीं, तब से लेकर आज तक इस मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था बनी हुई है। इस दौरान लोगों का ऐसा मानना है कि जो भक्त यहां आकर सच्चे मन से मन्नते मांगते है। उनकी मुरादे जरूर पूरी होती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुकुर खांसी या कुत्ते के काटने से लोग यहां की मिट्टी का इस्तेंमाल करते हैं। इसके साथ ही नवरात्रि के दौरान लोग यहां मनोकामना ज्योतिकलश प्रज्चलित करते है। लोग इस ज्योतिकलश को वफादारी का जोत भी मानते है। ऐसे में महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा अर्चना भी किया जाता है। हालांकि,आज यह मंदिर न सिर्फ क्षेत्र में बल्कि दूरदराज क्षेत्रों मे भी प्रसिद्व है। शायद यह वजह है लोग पूरी श्रद्वा के साथ अपनी मनोकामना लेकर यहां आते है और उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस का इतिहास
अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस की शुरूआत सबसे पहले साल 2004 में हुई थी. साल 2004, 26 अगस्त के दिन पहली बार ‘कोलीन पैगे’ के परिवार ने अपने पहले कुत्ते ‘शेल्टी’ को गोद लिया था, उस वक्त उसकी उम्र 10 साल थी. इस दिन से हर साल 26 अगस्त को पुरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस मनाया जाने लगा.

बता दें कि कोलीन पैगे, एक मशहूर पालतू और पारिवारिक जीवन शैली विशेषज्ञ, पशु बचाव अधिवक्ता, संरक्षणवादी, डॉग ट्रेनर और लेखक थे. यही नहीं कोलीन पैगे राष्ट्रीय पिल्ला दिवस, राष्ट्रीय बिल्ली दिवस और राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस के संस्थापक भी हैं.

अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस मनाने का उद्देश्य और महत्व
अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों द्वारा कुत्तों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें बेहतर जीवन देना है. इसके साथ ही इस दिन का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इस दिन उन लोगों को जागरूक किया जाता है, जो लोग कुत्तों को अपना दुश्मन समझते हैं और उन्हें दुरकारते है या फिर उन्हें बीमार होने पर छोड़ देते हैं. हालांकि हम में से ज्यादातर लोग अपने सबसे प्यारे दोस्त कुत्तों के प्रति देखभाल और प्यार दिखाते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जो अक्सर उन्हें बेरहमी से गाली देते नजर आते हैं. ऐसे में इस दिन ऐसे मुद्दों के बारे में कार्यक्रम का आयोजन कर जागरूकता फैलाया जाता है.


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