April 29, 2026

Ganesh Chaturthi 2022: पूजा में इन बातों का रखें ध्यान वरना हो जाएगी अनहोनी

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रायपुरः गणेश चतुर्थी तिथि का आरंभ 30 अगस्त को 3 बजकर 33 मिनट से होगा और 31 अगस्त को 3 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। मध्याह्न गणेश पूजा के लिए 31 अगस्त को सुबह 10 बजकर 48 मिनट से 01 बजकर 19 मिनट तक समय श्रेष्ठ है। चंद्र दर्शन से बचने का समय सुबह 9 बजकर 3 मिनट से रात्रि 8 बजकर 59 तक का है।


गणेश स्थापना विधि
गणपति को घर में स्थापित करने से पहले पूजा स्थल की सफाई करें। गणपति की स्थापना करने से पहले स्नान करने के बाद नए या साफ धुले हुए बिना कटे-फटे वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं।

सबसे पहले घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्प लें। फिर गणेश जी का ध्यान करने के बाद उनका आह्वन करें। फिर एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर अक्षत (चावल), या गेहूंं, मूंग, ज्वायर रखें और गणपति को स्थापित करें। आप चाहे तो बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित कर सकते हैं। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्वरूप एक-एक सुपारी रखें।

इन बातों का ध्यान रखें
• आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
• जल से भरा हुआ कलश गणेश जी के बाएं रखें।
• चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करें।
• कलश पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें।
• गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखें।
• गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था, इसलिए मध्याह्न में ही प्रतिष्ठापित करें।
• पूजा का समय नियत रखें। जाप माला की संख्या भी नियत ही रखें।
• गणेश जी के सम्मुख बैठकर उनसे संवाद करें। मंत्रों का जाप करें। अपने कष्ट कहें।
• शिव परिवार की आराधना अवश्य करें यानी भगवान शंकर और पार्वती जी का ध्यान अवश्य करें।

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि
गणपति की स्थापना के बाद इस तरह पूजन करें-
सबसे पहले घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणपति को दूर्वा या पान के पत्ते की सहायता से गणेश को स्नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्नान कराएं। अब गणेश जी को पीले वस्त्र चढ़ाएं, अगर वस्त्र नहीं हैं तो आप उन्हें मोली को वस्त्र मानकर अर्पित करें।

इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर (कुमकुम), चंदन, अक्षत लगाएं, फूल चढ़ाएं और फूलों की माला अर्पित करें और आभूषण से अलंकृत करें। अब बप्पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं। अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें, हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्तेमाल करें। नैवेद्य का भोग लगाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल हैं। गणेश जी को मोदक और बूंदी के लड्डू अति प्रिय हैं उनका भोग अवश्य लगाएं। पान लौंग इलायची और द्रव्य चढ़ाएं, उसके पश्चात् ऋतु फल अर्पित करें।

इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिणा प्रदान करें। अब अपने परिवार के साथ गणपति की और शंकर जी आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है। इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करें। अब गणपति की परिक्रमा करें. ध्यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है। इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें। पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।

भगवान गणेश की जन्म कथा
भगवान गणेश के जन्म को लेकर कथा प्रचलित है कि देवी पार्वती ने एक बार शिव के गण नंदी के द्वारा उनकी आज्ञा पालन में त्रुटि के कारण अपने शरीर के मैल और उबटन से एक बालक का निर्माण कर उसमें प्राण डाल दिए और कहा, “तुम मेरे पुत्र हो। तुम मेरी ही आज्ञा का पालन करना और किसी की नहीं। हे पुत्र! मैं स्नान के लिए भोगावती नदी जा रही हूं, कोई भी अंदर न आने पाए।”

कुछ देर बाद वहां भगवान शंकर आए और पार्वती के भवन में जाने लगे। यह देखकर उस बालक ने उन्हें रोकना चाहा, बालक हठ देख कर भगवान शंकर क्रोधित हो गए। इसे उन्होंने अपना अपमान समझा और अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर भीतर चले गए। स्वामी की नाराजगी का कारण पार्वती समझ नहीं पाईं। उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। तब दूसरी थाली देख शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा, “यह किसके लिए है?”

पार्वती बोलीं, “यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है, क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा?” यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए और पार्वती को सारा वृत्तांत कह सुनाया। यह सुन देवी पार्वती क्रोधित हो विलाप करने लगीं। उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा।

पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव के कहने पर विष्णु जी एक हाथी के बच्चे का सिर काट कर ले आए। भगवान शिव ने वह सिर उस बालक के धड़ पर रख कर उसे जीवित किया। भगवान शंकर और अन्य देवताओं ने उस गजमुख बालक को अनेक आशीर्वाद दिए। देवताओं ने गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहरता, प्रथम पूज्य आदि कई नामों से उस बालक की स्तुति की।

कैसी हो गणेश प्रतिमा
शास्त्रों में कहा गया है कि हर रंग की मूर्ति के पूजन का फल भी अलग होता है। पीले रंग और लाल रंग की मूर्ति की उपासना को शुभ माना गया है।
• पीले रंग की प्रतिमा की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
• सफेद रंग के गणपति की उपासना से ऋणों से मुक्ति मिलती है।
• चार भुजाओं वाले लाल गणपति की उपासना से सभी संकट दूर होते हैं।
• बैठे हुए गणपति की मूर्ति ही खरीदें, इन्हें घर में रखने से स्थाई धन लाभ होता है।
• गणेश जी की ऐसी मूर्ति ही घर के लिए खरीदें, जिसमें उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हो।

गणेश जी की उपासना जितने भी दिन चलेगी अखंड घी का दीपक जलता रहेगा। गणेश जी को दूब प्रिय हैं, दूब अर्पित करें। मोदक का भोग लगाएं। मोदक घर में बनाएं तो ज्यादा बेहतर होता है। चतुर्थी का संयोग गणेश जी की उपासना में अत्यंत शुभ एवं सिद्धिदायक होता है। चतुर्थी का माहात्म्य यह है कि इस दिन विधिवत् व्रत करने से श्रीगणेश तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं। चतुर्थी का व्रत विधिवत करने से व्रत का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त हो जाता है।

डिस्क्लेमर: सलाह पर अमल करने से पहले धर्मग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र की राय जरूर लें।


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