अब बिना PhD और UGC NET के बनेंगे प्रोफेसर, यूजीसी के जारी किए नए दिशानिर्देश
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित नये दिशा-निर्देशों के अनुसार, विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अब मशहूर एक्सपर्ट्स को प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) इन यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस कैटेगरी के तहत फैकल्टी मेंबर्स के रूप में नियुक्त कर सकेंगे. इसके लिए औपचारिक शैक्षणिक योग्यता और प्रकाशन की आवश्यकताएं अनिवार्य नहीं होगी. यह योजना उन लोगों के लिए खुली नहीं होगी जो शिक्षण पद पर हैं, चाहे सेवारत या सेवानिवृत्त हों.


इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ नियुक्ति के लिए एलिजिबिल होंगे–
इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, सिविल सेवा और सशस्त्र बल. दिशानिर्देशों अनुसार, ”जिन व्यक्तियों की अपने विशिष्ट पेशे या भूमिका में कम से कम 15 साल की सेवा या अनुभव के साथ विशेषज्ञता है, वे ‘प्रोफेसर्स आफ प्रैक्टिस’ के लिए पात्र होंगे.
पीओपी, मुख्य रूप से गैर-कार्यकाल वाले फैकल्टी मेंबर होते हैं. इसके जरिए दुनिया भर में नियुक्ति की जाती है. भारत में भी, पीओएस को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली, मद्रास और गुवाहाटी में नियुक्त किया जाता है. इसी तरह की नियुक्ति मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, एसओएएस यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी आफ हेलसिंकी जैसे कई विश्वविद्यालयों में प्रचलित है.
पीओपी स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से तक हो
दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी समय उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) में पीओपी की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. दिशानिर्देशों में कहा गया है कि किसी संस्थान में सेवा की अधिकतम अवधि तीन साल से अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसे असाधारण मामलों में एक साल तक बढ़ाया जा सकता है.
मेंबर्स को तीन श्रेणियों में नियुक्त किया जाएगा
1- उद्योगों द्वारा वित्त पोषित प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस,
2-प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस
3-मानद आधार पर प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस.
”प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए, स्वीकृत पदों को छोड़कर होगी. यह स्वीकृत पदों की संख्या और रेगुलर फैकल्टी मेंबर्स की भर्ती को प्रभावित नहीं करेगी

