School Bus Ka Rang Pila Kyo Hota Hai: स्कूल बस हमेशा पीली ही क्यों होती है? इसके पीछे छिपा है दिमाग हिला देने वाला साइंस!
School Bus Ka Rang Pila Kyo Hota Hai: रायपुर। जब भी सड़क पर कोई पीली बस गुजरती है, तो बिना कुछ सोचे हम पहचान लेते हैं कि ये स्कूल बस है! लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि स्कूल बसों का रंग हमेशा पीला ही क्यों होता है?(School Bus Ka Rang Pila Kyo Hota Hai) आखिर क्यों नहीं नीला, हरा या लाल? इसके पीछे सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध और सुरक्षा की बड़ी कहानी छुपी है।


कैसे शुरू हुई “पीली स्कूल बस” की परंपरा?
20वीं सदी के शुरुआती दौर में अमेरिका में स्कूल बसों का कोई एक जैसा रंग नहीं होता था। हर राज्य में अलग-अलग रंग की बसें चलती थीं। इससे न सिर्फ भ्रम की स्थिति बनती थी, बल्कि एक्सीडेंट्स की संभावना भी बढ़ जाती थी।
इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रैंक साइर ने 1939 में न्यूयॉर्क में एक राष्ट्रीय बैठक बुलाई।
सात दिन चली इस बैठक में शिक्षा और परिवहन विभाग के सैकड़ों विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने मिलकर तय किया कि अब से पूरे देश में स्कूल बसों का रंग एक जैसा होगा — नेशनल स्कूल बस ग्लॉसी येलो।
क्यों चुना गया पीला रंग? साइंस करता है खुलासा
दरअसल, हर रंग की अपनी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) होती है, जिसे नैनोमीटर में मापा जाता है।
लाल रंग: लगभग 650 नैनोमीटर
पीला रंग: लगभग 580 नैनोमीटर
लाल रंग की तरंगदैर्ध्य ज्यादा होने से वह दूर तक दिखता है, लेकिन ड्राइविंग के दौरान पीला रंग लाल से 1.24 गुना ज्यादा स्पष्ट नजर आता है — इसे लैटरल पेरिफेरल विजन कहा जाता है।
यानी अगर ड्राइवर सड़क के सीधे सामने देख रहा है, तो भी साइड से आती हुई पीली बस उसे तुरंत दिखाई दे जाती है।
आंखों की संरचना से जुड़ा कमाल का लॉजिक
हमारी आंखों में दो प्रमुख सेल होते हैं — लाल और हरे रंग के फोटोरिसेप्टर सेल्स। पीला रंग दोनों को एक साथ एक्टिव कर देता है, जिससे दिमाग को दोहरी सूचना मिलती है। इसलिए पीला रंग बाकी रंगों के मुकाबले ज्यादा तेज और तुरंत नजर आता है। इसके अलावा, यह रंग कम चमक (Low Reflection) पैदा करता है, जिससे आंखों को थकान नहीं होती।

