अंधविश्वास के चलते जान से खिलवाड़: गाज की चपेट में आई दो लड़कियां, तो ग्रामीणों ने गाड़ दिया गोबर में
अंबिकापुर: इक्कीसवीं सदी में भी अंधविश्वास घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। एक ऐसा ही मामला सरगुजा जिले से सामने आया है। जहां गांधीनगर थाना अंतर्गत ग्राम ठाकुरपुर के सुपेलपारा मोहल्ले में गाज की चपेट में आने से झुलसी दो बालिकाओं को परिजन व ग्रामीणों ने गोबर के ढेर में दबा दिया। दोनों का सिर्फ सिर ही बाहर निकला था।


सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची, इसके बाद दोनों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना रविवार शाम की बताई जा रही है। ठाकुरपुर सुपेलपारा निवासी 10 वर्षीय रोशनी तिग्गा और 8 वर्षीय आस्था तिग्गा आम पेड़ के नीचे खेल रही थी। इस दौरान मौसम ने अचानक करवट ले ली, तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। दोनों बालिकाएं आम पेड़ के नीचे ही खड़ी हो गई।
इस दौरान तेज गर्जना के साथ गाज गिरी और दोनों बालिकाएं उसकी चपेट में आ गई। परिजन और गांव वालों को जैसे ही घटना की जानकारी मिली वे बच्चों को अस्पताल ले जाने के बजाय दोनों को गोबर में गाड़ दिया। घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन किसी ने भी उन्हें अस्पताल ले जाने समझाइश नहीं दी।
जब डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची तो दोनों बालिकाओं को गोबर से बाहर निकलवा कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ्ट कराया। जहां उनका इलाज जारी है।
बता दें कि आदिवासी बहुल सरगुजांचल में गाज की चपेट से झुलसने वाले लोगों को गोबर में गाड़ देने या पूरे शरीर में गोबर का लेप लगा देने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों का विश्वास होता है कि गोबर से ढक देने से गाज से झुलसने वाला व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है।

