June 30, 2026

“साहब! डर के मारे घर में चूल्हा नहीं जला, भूखी हूँ…” विधायक कॉलोनी के लिए उजड़े आशियाने, तो रो पड़ी मासूम, जानिए आखिर नकटी गांव में क्यों चली JCB

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना इलाके के नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय भारी तनाव और हंगामा खड़ा हो गया, जब प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए अतिक्रमण हटाने पहुंची। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए यहाँ करीब 80 घरों को मलबे में तब्दील कर दिया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास के तहत बने 32 पक्के मकान भी शामिल हैं।


इस कार्रवाई के विरोध में स्थानीय ग्रामीण जेसीबी मशीनों के आगे लेट गए, जिसके बाद पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प और भारी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने रविवार देर रात से ही गांव में 1000 से ज्यादा पुलिस जवानों को तैनात कर दिया था।

सुबह से कुछ नहीं खाया, घर में खाना ही नहीं बना…

प्रशासनिक कार्रवाई के बीच गांव में चीख-पुकार और बेबसी का माहौल देखा गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक मासूम बच्ची ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि रविवार रात से ही गांव में भारी पुलिस बल तैनात था और सुबह कार्रवाई के डर से उसके घर में चूल्हा तक नहीं जल पाया, जिसके कारण उसने सुबह से कुछ नहीं खाया है। कई परिवार अपने आशियाने को टूटता देख बिलखते नजर आए।

सांसद के वादे पर फूटा गुस्सा, धरने पर बैठे ग्रामीण

इस कार्रवाई से ग्रामीणों में प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि महज दो दिन पहले ही सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बारिश के मौसम में किसी भी परिस्थिति में उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। सांसद के इस भरोसे के बाद सोमवार सुबह अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई से लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और आक्रोशित होकर जमीन पर ही धरने पर बैठ गए हैं।

प्रशासन का दावा: “सरकारी जमीन पर था कब्जा, EWS में कर रहे शिफ्ट

बढ़ते बवाल और चौतरफा घिरने के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले पर सफाई दी है। प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर ये मकान बने थे, वह पूरी तरह सरकारी भूमि है और इस पर अवैध कब्जा किया गया था।

प्रभावित परिवारों को बेघर नहीं छोड़ा जा रहा है, बल्कि उनके पुनर्वास की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रभावितों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) मकानों में बसाने के लिए आवंटन प्रक्रिया तेजी से जारी है।

ग्रामीणों का तर्क: “जब पीएम आवास मिला, तो कब्जा कैसे हुआ?

दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि वे यहाँ कई पीढ़ियों और सालों से रह रहे हैं। यह जमीन नकटी गांव के वार्ड 16 और 17 का हिस्सा है, जो पहले गांव की निस्तारी भूमि थी और बाद में आबादी क्षेत्र में शामिल हो गई। ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, अगर यह जमीन अवैध कब्जा थी, तो सरकार ने खुद यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान क्यों स्वीकृत किए और पैसे क्यों दिए? अब इसे कब्जा बताकर बेदखल करना सरासर गलत है।

विधानसभा सत्र के बाद तेज हुई कार्रवाई की स्क्रिप्ट

दरअसल, इस पूरी कार्रवाई की नींव पिछले साल विधानसभा के बजट सत्र में पड़ी थी। 21 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह ने रायपुर में विधायकों और सांसदों को जमीन देने के प्रस्ताव पर सवाल पूछा था।

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सदन में जवाब देते हुए कहा था कि हम नया रायपुर के नकटी गांव में विधायकों के लिए जमीन देख रहे हैं। यह प्रक्रिया अभी अंतिम निर्णय के अधीन है।

मंत्री के इस बयान के बाद से ही प्रशासन ने इस क्षेत्र को खाली कराने की कवायद तेज कर दी थी। पिछले साल भी इन परिवारों को नोटिस देकर हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब चौतरफा विरोध और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दखल के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। मगर इस बार प्रशासन ने बिना मौका दिए मानसून की शुरुआत में ही यह बड़ी कार्रवाई कर दी, जिससे पूरे नकटी गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

विधायक अनुज शर्मा ने क्या कहा देखाए –

 

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