May 7, 2026

नौकरी-व्यापार या अन्य कार्यक्षेत्र में सफलता के लिए चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें याद

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चाणक्य नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने सफलता के अचूक मंत्र दिए हैं, जो सैद्धांतिक की बजाय व्यवहारिक हैं। इस कारण चाणक्य नीति की उपयोगिता अब तक प्रासंगिक है। चाणक्य नीति की कुछ विशेष बातों को यदि व्यक्ति अपने जीवन में उतार ले तो वह कभी भी असफल नहीं हो सकता है। उसे हर क्षेत्र में कामयाबी मिलेगी। चाणक्य नीति के ये विशेष बातें इस प्रकार हैं-


तावद् भयेषु भेतव्यं यावद्भयमनागतम्। आगतं तु भयं दृष्टवा प्रहर्तव्यमशङ्कया॥
भावार्थ: संकटों से तभी तक डरना चाहिए जब तक वे दूर हैं, परन्तु संकट सिर पर आ जाये तो उस पर शंकारहित होकर प्रहार करना चाहिए।

यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः। न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ॥
भावार्थ: चाणक्य नीति अनुसार जिस देश में सम्मान न हो, आजीविका न मिले, कोई भाई-बन्धु न रहता हो और जहाँ विद्या-अध्ययन सम्भव न हो, ऐसे स्थान पर नहीं रहना चाहिए।

यो ध्रुवाणि परित्यज्य ह्यध्रुवं परिसेवते। ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव तत् ॥
भावार्थ: जो व्यक्ति निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है और अनिश्चित भी।

कामधेनुगुणा विद्या ह्ययकाले फलदायिनी। प्रवासे मातृसदृशा विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥
भावार्थ: विद्या कामधेनु के समान गुणों देने वाली मानी जाती है, जो बुरे समय में भी फल देनेवाली है, प्रवास काल में माँ के समान तथा गुप्त धन है।

कः कालः कानि मित्राणि को देशः को व्ययागमोः। कस्याहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः॥
भावार्थ: व्यक्ति को इन चीजों के बारे में बार-बार सोचना चाहिए- कैसा समय है ? कौन मित्र है ? कैसा स्थान है ? आय-व्यय क्या है ? में किसकी और मेरी क्या शक्ति है ?


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