Kedarnath Yatra 2023: विधि विधान के साथ खोले गए केदारनाथ के कपाट… यात्रा करने वाले हर शिव भक्त को मालूम होनी चाहिए ये 8 बड़ी बातें
उत्तराखंड: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उत्तराखंड (Uttarakhand) स्थित केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट मंगलवार को दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं. केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Temple) के कपाट पूरे विधि विधान के साथ खोले गए, इस दौरान मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था. मंदिर के कपाट जिस वक्त खोले गए उस समय वहां करीब आठ हजार श्रद्धालु पहुंचे थे.


हालांकि, मौसम खराब रहने की आशंका के मद्देनजर सोमवार को श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही थी. हालांकि जब मंगलवार की सुबह मंदिर के कपाट खुले तो वहां करीब आठ हजार के आसपास श्रद्धालु मौजूद थे. इस दौरान मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था. अब अगले छह महीने तक श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे.
वहीं मौसम विभाग द्वारा 29 अप्रैल तक बर्फबारी और बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किए जाने की वजह से राज्य सरकार ने रविवार को केदारनाथ के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण 30 तारीख तक के लिए बंद कर दिया. जबकि ऋषिकेश, गौरीकुंड, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग सहित कई जगहों पर यात्रियों को फिलहाल वहीं ठहरने को कहा जा रहा है.
सरकार ने श्रद्धालुओं से की अपील
इससे पहले श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया था कि मंगलवार की सुबह 06:20 मिनट पर केदारनाथ धाम के कपाट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे. जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है. बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली भी सोमवार धाम में पहुंच गई.
अजेंद्र अजय ने कहा कि अत्यधिक ठंड के बावजूद मंदिर के कपाट खुलने का साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच गए हैं. केदारनाथ धाम में रुक- रुक कर बर्फबारी व बारिश को देखते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और प्रतिकूल मौसमी दशाओं के मद्देनजर केदारनाथ धाम में निवास की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की अपील भी की.
ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ धाम से जुड़े कुछ रोचक बातें
सनातन परंपरा से जुड़े हर व्यक्ति की कामना होती है कि वह अपने जीवन में एक बार 12 ज्येातिर्लिंगों में से एक बाबा केदारनाथ की यात्रा जरूर करे. हिमालय की गोद में स्थित बाबा केदारनाथ धाम के कपाट आज छह महीने बाद एक बार फिर से खुल गए हैं. ऐसे में हर किसी शिव भक्त की चाह है कि वह बाबा के दरबार में जाकर एक बार अपनी हाजिरी जरूर लगाए. यदि आप भी कुछ ऐसी ही प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको केदारनाथ की यात्रा करने से पहले इस पावन धाम से जुड़े तमाम धार्मिक रहस्यों को जरूर जानना चाहिए. आइए शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ धाम से जुड़े रोचक बातों के बारे में विस्तार से जानते हैं.
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार भगवान श्री विष्णु ने नर और नारायण रूप में अवतार लिया और महादेव की तपस्या करके उनसे यह वरदान लिया कि वे हिमालय की गोद में शिवलिंग रूप में स्थापित होंगे.
जिस स्थान पर भगवान शिव स्थापित हुए वह राजा केदार का क्षेत्र आता था. राजा केदार के नाथ कहलाने वाले शिव को बाद में बाबा केदारनाथ के नाम से जाना गया.
मान्यता है कि बाबा केदारनाथ के इस पावन धाम की पांडवों ने खोज की थी और सालों बर्फ के नीचे दबे रहने के बाद इस पावन धाम का कालांतर में आदि शंकाराचार्य ने जीर्णोद्धार करवाया था.
बाबा केदारनाथ के मंदिर में मुख्य शिवलिंग के अलावा भी कई देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं. मंदिर के भीतर जाने पर आपको माता पार्वती, नंदी के साथ पांच पांडवों, द्रौपदी आदि की भी मूर्ति देखने को मिलती हे.
सााल 2013 में आए जल प्रलय में बहकर आई बड़ी शिला जिसके कारण मंदिर सुरक्षित रहा, उस देव शिला की भी वर्तमान में पूजा होती है.
मान्यता है कि केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के पृष्ठ भाग और नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में अग्रभाग की पूजा होती है.
12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम और रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग को यदि मानचित्र में देखा जाए तो दोनों एक सीध में हैं.
केदारनाथ मंदिर छह महीने तक खुला और छह महीने तक बंद रहता है. सर्दियां आते ही दीपावली के बाद बाबा केदारनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और गर्मियों में इसे फिर दोबारा खोला जाता है. इस दौरान मंदिर के भीतर एक बड़ा दिया लगातार छह महीने तक जलता रहता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस व्यक्ति की केदारनाथ धाम में मृत्यु होती है, उसे शिव कृपा से सीधे मोक्ष को प्राप्त होता है.
(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

