केरल से टकराया मानसून: जानिए आपके राज्य में कब देगी दस्तक
केरल: भारतीय मौसम विभाग ने 8 जून को खुशखबरी दी कि मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है। यह एक दिन में कर्नाटक तक पहुंच गया है। हालांकि चक्रवात बिपरजॉय से दो-तीन दिन तक इसकी तीव्रता धीमी कर पड़ने की संभावना है। इसके बाद मानसून फिर रफ्तार पकड़ेगा।


भारत में मानसून कैसे आता है?
भारत में ये हवाएं 2 दिशाओं से आती हैं। दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व। ऐसे में भारत में केरल के तट से टकराने के बाद मानसून दो तरफ से देश में प्रवेश करता है।
पहला : अरब सागर से होकर चलने वाला मानसून केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार जैसे राज्यों में बारिश कराता है। इसे दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहते हैं।
दूसरा : बंगाल की खाड़ी से होकर चलने वाला मानसून तमिलनाडु, ओडिशा से होते हुए नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में बारिश कराते हुए बांग्लादेश की ओर निकल जाता है। इसे दक्षिण-पूर्व मानसून कहते हैं।
केरल में तो मानसून आ गया, देश के अन्य हिस्सों में कब तक पहुंचेगा?
केरल में मानसून के थोड़ी देरी से पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि मानसून देश के अन्य हिस्सों में भी देरी से पहुंचेगा। साथ ही मानसून का देर से आने का यह मतलब नहीं है कि कम बारिश होगी।
मौसम वैज्ञानिक डीपी दुबे ने बताया कि केरल में मानसून आ गया है। अरब सागर में एक स्ट्रॉन्ग वेदर सिस्टम बन रहा है। यह मानसून के लिए अच्छा संकेत हैं। यह 13-14 जून तक गुजरात पहुंच जाएगा। इसकी वजह से मध्यप्रदेश में 13 से 15 जून तक प्री मानसून एक्टिविटी होगी। गुजरात में अगर यह सिस्टम बना रहा तो 19 जून तक मध्यप्रदेश में मानसून छा जाएगा।
मौसम विभाग किस आधार पर घोषणा करता है कि मानसून आ गया?
मौटे तौर पर देश में मानसून आने की घोषणा तब की जाती है जब केरल, लक्षद्वीप और कर्नाटक में मानसून की शुरुआत की घोषणा करने वाले 8 स्टेशनों में लगातार दो दिनों तक कम से कम 2.5 मिमी बारिश हो। ज्यादा डिटेल में जाएं तो मौसम विभाग मानसून आने की घोषणा तीन आधार पर करता है…
क्या मानसून से सिर्फ भारत में ही बारिश होती है?
नहीं। दुनिया की करीब 60% आबादी मानसून से होने वाली बारिश वाले इलाकों में रहती है। इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका जैसे महाद्वीप भी शामिल हैं।
भारत में भी जो मानूसन आता है उससे केवल भारत ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार समेत पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में बारिश होती है।
बारिश को आखिर मापते कैसे हैं?
1662 में क्रिस्टोफर व्रेन ने ब्रिटेन में पहला रेन गॉग बनाया था। यह एक बीकर या ट्यूब के आकार का होता है जिसमें रीडिंग स्केल लगा होता है। इस बीकर पर एक फनल होती है, जिससे बारिश का पानी इकट्ठा होकर बीकर में आता है।
बीकर में पानी की मात्रा को नापकर ही कितनी बारिश हुई है ये पता लगाया जाता है। ज्यादातर रेन गॉग में बारिश मिलीमीटर में मापी जाती है।
मानसून या मौसम से जुड़ी जानकारी के लिए आप मौसम विभाग की वेबसाइट https://mausam.imd.gov.in को चेक कर सकते हैं।
इसके साथ ही मेघदूत, दामिनी, उमंग और रेन अलार्म जैसे ऐप पर भी आप मौसम की जानकारी चेक कर सकते हैं। मौसम विभाग ने किसानों को SMS अलर्ट की सुविधा भी दी है।

