अब बिना इंटरनेट मोबाइल पर लें मूवी का मजा, बस करना होगा ये काम
इन दिनों D2M नेटवर्किंग (डिवाइस-टू-मेटावर्स नेटवर्किंग) की बेहद चर्चाएं हो रही है। इस टेक्नोलॉजी से स्मार्टफोन यूजर्स को इंटरनेट पर निर्भर नहीं रहना होगा और लाइव टीवी और ओटीटी का मजा आसानी से ले सकेंगे।


दरअसल, केंद्रीय दूरसंचार विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और IIT कानपुर ने काम शुरू कर दिया है। लेकिन, इसका विरोध टेलीकॉम ऑपरेटर्स, चिप मैन्यूफेक्चरर, नेटवर्क प्रोवाइडर्स और हैंडसेट मेकर्स कर रहे हैं। क्योंकि D2M से उनका डेटा रेवेन्यू प्रभावित होना तय है।
D2M नेटवर्किंग एक नई प्रकार की नेटवर्किंग है, जो डिवाइसों को मेटावर्से में एक-दूसरे से जुड़ने की अनुमति देती है। यह डिवाइसों को एक साथ काम करने, कम्यूनिकेट करने और डेटा शेयर करने की अनुमति देता है, जिससे मेटावर्से में अधिक संपूर्ण बनाया जा सकता है।
D2M नेटवर्क का उपयोग करके ब्रॉडकास्टर रीजनल टीवी, रेडियो, एजुकेशन मटेरियल, इमर्जेंसी अलर्ट सिस्टम, आपदा से संबंधित जानकारी, वीडियो और डेटा-पावर्ड ऐप प्रदान कर सकते हैं। ये ऐप इंटरनेट के बिना चलेंगे और कम कीमत पर उपलब्ध होंगे।
D2M टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है
डी2एम तकनीक स्मार्टफोन पर एफएम रेडियो सुनने के समान काम करती है, जहां एक रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी पर टैप करता है। साथ ही ये डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्रसारण है, जिसमें एक डिश एंटीना उपग्रहों से सीधा प्रसारण सिग्नल प्राप्त करता है और उन्हें रिसीवर तक पहुंचाता है, जिसे सेट-टॉप बॉक्स के रूप में जाना जाता है।
D2M नेटवर्किंग का उपयोग इन तरह के ऐप्स में किया जा सकता है। आइए जानते हैं…
मेटावर्स: D2M नेटवर्किंग मेटावर्से को एक वास्तविक स्थान बनाने में मदद कर सकता है, जहां लोग एक-दूसरे के साथ अधिक नेचुरल तरीके से जुड़ सकते हैं।
ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR): D2M नेटवर्किंग AR और VR ऐप्स को अधिक कॉर्डिनेटेड बनाने में मदद कर सकता है।
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): D2M नेटवर्किंग IoT डिवाइसेस को एक-दूसरे के साथ अधिक आसानी से जुड़ने और डेटा शेयर करने की अनुमति दे सकता है।

