Gau Mata Rajya Mata: बागेश्वर धाम दरबार से निकली आवाज पर CM साय का ऐलान: छत्तीसगढ़ में ‘गौ माता’ को मिलेगा ‘राज्य माता’ का दर्जा
Chhattisgarh Me Gau Mata Ko Rajya Mata Ka Darja; रायपुर: महाराष्ट्र के बाद अब छत्तीसगढ़ भी देश का दूसरा राज्य बनने जा रहा है जहां ‘गौ माता’ को ‘राज्य माता’ का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी औपचारिक घोषणा रायपुर में आयोजित हनुमंत कथा महोत्सव के मंच से की। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी और जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।


यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने लंबे समय से गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय के इस ऐलान के बाद प्रदेशभर में धार्मिक संगठनों ने इसे “सनातन संस्कृति के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय” बताया है।
बागेश्वर धाम दरबार से निकली पहल
दरअसल, यह घोषणा रायपुर के गुढ़ियारी इलाके में समाजसेवी बसंत अग्रवाल द्वारा आयोजित हनुमंत कथा महोत्सव के दौरान की गई। इस कथा का संचालन बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कर रहे थे।
कथा के अंतिम दिन मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उनकी पत्नी कौशिल्या साय और राज्य के कई मंत्री मौजूद थे। इसी दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ में भी गौ माता को राज्य माता का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की संस्कृति, परंपरा और गौ-संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल होगी।
मुख्यमंत्री साय ने तत्क्षण मंच से इस मांग को स्वीकार करते हुए कहा—
“बाबा बागेश्वर ने पहले भी सुझाव दिया था कि हर तहसील में गोठान बने, और हमने ‘गोधाम’ योजना शुरू कर दी है। अब गायों के संरक्षण और सम्मान के लिए ‘राज्य माता’ का दर्जा देकर छत्तीसगढ़ नई मिसाल पेश करेगा।”
“नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है” — सीएम विष्णुदेव साय
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राज्य की शांति और विकास यात्रा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है, उसकी “कमर टूट चुकी है” और यह भगवान श्रीराम, हनुमानजी और बागेश्वर बाबा के आशीर्वाद से संभव हुआ है।
“छत्तीसगढ़ आस्था, अध्यात्म और सेवा का प्रदेश है। यहां की धरती पर गाय, गंगा और गीता तीनों का समान सम्मान है। गौमाता को ‘राज्य माता’ का दर्जा देना हमारे संस्कारों का सम्मान है।”
धार्मिक भावनाओं से जुड़ा निर्णय, प्रशासनिक प्रक्रिया जल्द
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट में चर्चा के बाद औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद गायों के संरक्षण, गोठानों के विकास और गौशालाओं की सुदृढ़ता के लिए विशेष नीति भी बनाई जाएगी।
धार्मिक संगठनों ने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और गौ-संवर्धन नीति को नया आयाम मिलेगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगा क्योंकि राज्य के हजारों परिवार गाय-आधारित आजीविका पर निर्भर हैं।

