April 18, 2026

ग्रीन फंगस : देश में पहली बार मिला ग्रीन फंगस का केस, ब्लैक से भी ज्यादा खतरनाक है ग्रीन फंगस

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इंदौर: राज्य में ब्लैक (Black fungus), वाइट (White fungus) और यलो (yellow fungus) फंगस के बाद अब ग्रीन फंगस (Green fungus) का केस भी सामने आ गया है. इंदौर (Indore) देश का पहला ऐसा शहर है जहां पर ग्रीन फंगस का केस मिला है. शहर के अरबिंदो अस्पताल (Aurobindo hospital) में एडमिट मरीज में ग्रीन फंगस के लक्षण पाए गए हैं. मरीज में ग्रीन फंगस की पहचान होते ही उसे फौरन एयरलिफ्ट कर मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल भेज दिया गया


शहर के माणिकबाग इलाके में रहने वाला 34 साल का मरीज सबसे पहले कोरोना से पीड़ित संक्रमित हुआ था. कोरोना के कारण उसके 90% फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था. 2 महीने तक मरीज का इलाज चला. जिसके बाद तबीयत में सुधार होते ही उसकी छुट्टी कर दी गई,लेकिन घर जाने के 10 दिन बाद मरीज की हालत फिर से बिगड़ने लगी. उसके राइट फेफड़े में मवाद भर गया था. फेफड़े और साइनस में एसपरजिलस फंगस हो गया था जिसे ग्रीन फंगस कहा जा रहा है.

ग्रीन फंगस है ब्लैक से भी ज्यादा खतरनाक
डॉक्टरों की माने को ग्रीन फंगस, ब्लैक फंगस से कहीं ज्यादा खतरनाक है. इंदौर में मरीज को ग्रीन फंगस होने के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी. मरीज के मल में खून आने लगा था. बुखार भी 103 डिग्री बना हुआ था. सबसे बड़ी बात है कि ग्रीन फंगस के मरीज पर एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन भी असर नहीं करता है.

मरीज की हालत गंभीर
देश में ग्रीन फंगस का ये पहला मामला है जो पोस्ट कोविड मरीज में देखा गया है. कोरोना की रफ्तार तो कम हो चुकी है, लेकिन ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है. ऐसे में ग्रीन फंगस का डिटेक्ट होना गंभीर विषय है. फिलहाल,मरीज को बेहतर इलाज के लिए मुंबई भेजा गया है. बता दें चूंकि ये देश का पहना ग्रीन फंगस का केस है तो शुरुआती चरण में इस के इलाज के लिए डॉक्टरों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.


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