April 18, 2026

800 साल पुराने इस दुर्ग को कहा जाता है ‘सांपों का किला’, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

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हमारे देश में कई ऐसे किले है जो सैकड़ों साल पुराने है और जो अपनी किसी ना किसी खासियत के लिए समूचे देश में जाने जाते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे किले ही प्राचीन और एतिहासिक किले के बारे में के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे ‘सांपों का किला’ कहा जाता है.


हम जिस किले के बारे में बात कर रहे हैं उसका नाम है पन्हाला दुर्ग, जिसे पन्हालगढ़, पनाला और पहाला आदि नामों से भी जाना जाता है. यह किला महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से दक्षिण पूर्व में 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यूं तो ये छोटा सा शहर और हिल स्टेशन है, लेकिन इसका इतिहास शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है.

शिवाजी से जुड़ा है इसका इतिहास
ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले ये किला यादवों, बहमनी और आदिल शाही जैसे कई राजवंशों के अधीन था, लेकिन 1673 ईस्वी में इसपर शिवाजी महाराज का अधिकार हो गया. कहा जाता है कि शिवाजी महाराज पन्हाला किले में सबसे अधिक समय तक रहे थे. उन्होंने यहां 500 से भी ज्यादा दिन बिताए थे. बाद में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया था.

इस दुर्ग को ‘सांपों का किला’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी बनावट टेढ़ी-मेढ़ी है यानी यह देखने में ऐसा लगता है जैसे कोई सांप चल रहा हो. इसी किले में तीन मंजिला इमारत के नीचे एक गुप्त रूप से बनाया गया कुआं है, जिसे अंधार बावड़ी के नाम से जाना जाता है.

माना जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण मुगल शासक आदिल शाह ने करवाया था. इसके निर्माण की वजह ये थी कि आदिल शाह का मानना था कि जब भी दुश्मन किले पर हमला करेंगे तो वो आसपास के कुओं या तालाबों में मौजूद पानी में जहर मिला सकते हैं.


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