Ayodhya Ram Mandir : राम मंदिर की सेटेलाइट इमेज आई सामने, देखें कैसे हो रहा भव्य परिसर का निर्माण
अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राम मंदिर निर्माण का काम (Ram Mandir Construction) जोरों से चल रहा है. इस बीच मंदिर निर्माण कार्य की स्टेलाइट इमेज (Satellite images) सामने आई हैं जिसमें निर्माण कार्य साफ दिख रहा है. गूगल अर्थ (Google Earth) की फोटों में जमीन की खुदाई और जमीन से मलबा निकालने को दिखाया गया है.


राम मंदिर की नींव को मजबूत करने के लिए जमीन से 40 फीट नीचे से कंक्रीट की लेयर्स डालने का कार्य चल रहा है. ऐसी 45 लेयर्स डालने के बाद 12 फीट ऊंचे चबूतरे पर भव्य राममंदिर के गर्भगृह-मंडप का निर्माण शुरू होगा. राम मंदिर की नींव के कार्य के लिए जन्मस्थल पर जमीन से 40 फीट नीचे तक बड़ी गहरी खुदाई की गई है. इस खुदाई के बाद जन्म स्थल से निकली तमाम मूर्तियों और मंदिर अवशेषों को संभाल कर रखा गया है.
After discussions with experts regarding foundation of Shri Ram Janmbhoomi Mandir, it has been decided that foundation work will be done using Roller Compacted Concrete technique. Total 40-45 layers of concrete will be put in 1,20,000 sq feet area. 4 layers have been completed. pic.twitter.com/qwID39hhjH
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) May 31, 2021
नींव भरने का काम अक्टूबर तक होगा पूरा
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दूसरे चरण (Second Phase) की शुरुआत दिसंबर में होगी. राम मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, नींव भरने का कार्य अक्टूबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा और दिसंबर से निर्माण के दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी, जिसमें भव्य मंदिर का ढांचा तैयार करने के लिए पत्थर लगाने का कार्य किया जाएगा.

दिसंबर में पत्थर लगाने का काम होगा शुरू
राम मंदिर ट्रस्ट के न्यासी अनिल मिश्रा ने एक बयान में कहा था, ”दिसंबर में मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों को लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा और गुलाबी पत्थरों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है. राम जन्मभूमि में ही इन पत्थरों को काटने और तराशने का कार्य किया जाएगा. 400 फुट लंबाई और 300 फुट चौड़ाई वाली 50 फुट गहरी नींव में निर्माण सामग्री के 10 इंच मोटाई वाले मिश्रण की कई परतें बिछाई जाएंगी.” माना जा रहा है कि भव्य राम मंदिर दिसंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच भव्य राम मंदिर अयोध्या में बनकर तैयार हो जाएगा.

