April 18, 2026

Monkey-B virus : चीन में एक और खतरनाक वायरस मंकी-बी की दस्तक, पहली मौत के बाद मची खलबली

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अभी तक कोरोना वायरस का आतंक सुलझा नहीं है. न ही ये पता चल पाया है कि यह वायरस कहां की पैदाइश है. चर्चाएं कई हैं जिनमें चीन के मशहूर शहर वुहान का नाम आता है. सच्चाई जो भी हो, पूरी दुनिया इसका दंश झेल रही है. लोग काल के गाल में समा रहे हैं. इसके संक्रमण से जो लोग ठीक भी होते हैं, उनकी जिंदगी लंगड़ाती सी चल रही है. इसी बीच चीन में एक और खतरनाक और घातक वायरस virus ने दस्तक दे दी है. इस वायरस का नाम मंकी-बी monkey B virus है. इस वायरस ने चीन में ही एक डॉक्टर को शिकार बना लिया है. ये डॉक्टर सर्जन हैं और दो पशुओं का ऑपरेशन करते वक्त मंकी बी वायरस ने उन्हें जकड़ लिया है.


चीन के इस डॉक्टर-सर्जन का मामला ताजा जरूर है, लेकिन यह वायरस ताजा-तरीन नहीं है. रिपोर्ट बताती है कि मंकी बी monkey B virus का पहला मामला चीन में मार्च में प्रकाश में आया था. मई में इस वायरस से पहली मौत हुई और शिकार बने एक मवेशी के डॉक्टर-सर्जन जिन्होंने हाल में दो पशुओं का ऑपरेशन किया था. कहा गया है कि कई अस्पतालों का दौरा करने के बाद इस सर्जन की मौत हो गई. यह घटना मई मई महीने की है. इस सर्जन के सैंपल लिए गए और उसकी जांच हुई तो पता चला कि उनमें अल्फाहर्पिजवायरस का संक्रमण था.

जांच में क्या मिला
मेडिकल जांच के दौरान पीड़ित डॉक्टर (बाद में मृत) के बिस्टर फ्लूइड, ब्लड, नेजर स्वाब, थ्रोट स्वाब और प्लाज्मा के नमूने लिए गए. ये काम जीन सिक्वेसिंग के लिए किए गए. नमूनों को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर वायरल डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (IVDC) में भेजा गया. यहां पता चला कि सर्जन में मंकी बी वायरस का संक्रमण था. दरअसल, यह संक्रमण मकाऊ (एक तरह के बंदर) से फैलता है. यही बंदर मंकी बी वायरस का कुदरती घर (नेचुरल होस्ट) है. चूंकि मकाऊ से यह वायरस फैलता है, इसलिए चिंपाजी और कैपुचिन बंदर भी संक्रमित होते हैं और मरते हैं. इस वायरस को हर्पिज बी, मंकी बी वायरस, हर्पिजवायरस सिमी और हर्पिजवायरस बी के नाम से पुकारते हैं.

कितने लोगों में इनफेक्शन?
चीन के सर्जन की इस वायरस से मौत हुई है लेकिन कितने लोगों में संक्रमण फैला है, अभी इसकी जानकारी नहीं मिली है. हालांकि अभी तक जिन लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग की गई है, उनकी रिपोर्ट निगेटिव मिली है. साल 1932 में इस वायरस की उत्पत्ति का पहला मामला सामने आया था. तब से इस पर रिसर्च चल रही है और इसे बहुत घातक वायरस की श्रेणी में नहीं रखा जाता. यह वायरस लार, मल, पेशाब, दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड में संक्रमण कर अपना वास बना सकता है. परत पर भी इसका अस्तित्व हो सकता है जहां यह कुछ घंटों के लिए जिंदा रह सकता है. आम लोगों में इस वायरस का खतरा बेहद कम होता है, लेकिन लैब वर्कर, वेटनरियन (पशुओं का इलाज करने वाले डॉक्टर या नर्स) इसके बड़े शिकार हो सकते हैं.

क्या हो सकते हैं लक्षण
मंकी बी वायरस के लक्षण भी कोरोना की तरह हो सकते हैं. जैसे कोरोना में फ्लू जैसे लक्षण देखे जाते हैं, वैसे ही लक्षण monkey B वायरस के संक्रमण के बाद दिखते हैं. बुखार, सिहरन, मसल में दर्द, थकान, सिरदर्द जैसी परेशानी भी हो सकती है. शरीर पर फोड़े भी हो सकते हैं. सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त की शिकायत और पेट में दर्ज की समस्या हो सकती है. संक्रमण बढ़ने पर दिमाग में सूजन हो सकती है. इससे दिमागी और नाड़ियों का सिस्टम (न्यूरोलॉजिकल सिस्टम) गड़बड़ा सकता है. इस बीमारी के लक्षण 1 दिन से 3 हफ्ते तक रह सकते हैं.

इलाज कैसे होता है
मंकी बी monkey B virus के इलाज के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. कहा जा रहा है कि एंटीवायरल दवाएं इसके संक्रमण में कारगर हो सकती हैं. डॉक्टर का कहना है कि अगर किसी को बंदर काट ले तो सावधानी बरतने की जरूरत है.

जहां जख्म हो उसे साबुन से ठीक से धोएं. 15 मिनट तक आयोडीन से भी धोने की सलाह दी जाती है
जख्म पर पानी डालें और यह काम 15-20 मिनट तक करते रहें
बंदर काट ले तो तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लें और उसके परामर्श से ही दवा लें


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