काम की खबर! आखिर लोग दिवाली की रात ताश क्यों खेलते हैं?, जानिए इसके पीछे कौन-कौन सी कहानियां हैं…
आपने देखा होगा कि दिवाली की रात कई राज्यों में ताश का खेल खेला जाता है, जो एक तरह से जुए के रुप में ही खेला जाता है. अब यह एक तरह से ट्रेंड बन गया है और लोग साल में और कभी ताश खेले या ना खेलें, लेकिन दिवाली की रात ऐसा जरूर करते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इसकी क्या कहानी है और लोग ऐसा क्यों करते हैं…


वैसे तो धार्मिक किताबों में तो इसका कोई उल्लेख नहीं है और ताश खेलने का कोई जिक्र नहीं है. बस अब यह एक ट्रेंड बन गया है, जिसे फॉलो किया जा रहा है.
हालांकि, कई लोग इसे धार्मिक एंगल भी देते हैं और कहते हैं कि दीपावली की रात जुआ खेलना इसलिए शुभ है क्योंकि कार्तिक मास की इस रात को भगवान शिव और माता पार्वती ने चौसर खेला था. जिसमें भगवान शिव हार गए थे. तभी से दिवाली की रात जुआ खेलने की परंपरा जुड़ गई. लेकिन, इसका कहीं वर्णन नहीं है.
साथ ही कहा जाता है कि दीपावली की रात शगुन की रात मानी जाती है और इसमें माता लक्ष्मी का घर आने के लिए आह्वान किया जाता है. मान्यता है कि दिवाली की रात जुआ खेलना सालभर हार-जीत का संकेत माना जाता है और इस रात जुए में जो जीतता है, उसका भाग्य सालभर चमकता रहता है.
लेकिन, आपको बता दें कि महाभारत से लेकर कई ऐसे समय आए हैं, जब जुए से काफी कुछ खोया गया है. इसलिए जुआ खेलना गलत माना गया है, क्योंकि इसकी लत और भी खतरनाक हो सकती है.

